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Wednesday, March 21, 2018

दुर्गा मैया की आरती || Durga Aarti


जय अम्‍बे गौरी, मैया जय श्‍यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्‍यावत , हरि ब्रह्मा शिवरी।। जय० ।।

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्‍ज्‍वल से दोउ नैना, चन्‍द्रबदन नीको ।। जय० ।।

कनक समान कलेवर, रक्‍ताम्‍बर राजै।
रक्‍त पुष्‍प गलमाला, कण्‍ठन पर साजै।। जय० ।।

केहरि वाहन राजत, खड़ग खप्‍परधारी।
सुर नर मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी।। जय० ।।

कानन कुण्‍डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्‍द्र दिवाकर, राजत सम ज्‍योति।। जय० ।।

शुम्‍भ निशुम्‍भ विाडारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती।। जय० ।।

चण्‍ड मुण्‍ड संघारे, शोणित बीज हरे।
मधुकैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे।। जय० ।।

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी।। जय० ।।

चौसठ योगिनी गावत, ऩत्‍य करत भैरो।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू ।। जय० ।।

तुम हो जग की माता, तुम ही हो भर्ता।
भक्‍तन की दुख हरता, सुख-सम्‍पत्ति करता।। जय० ।।

भुजा चार अति शोभित, खड़ग खप्‍पर धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर रानी।। जय० ।।

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्‍योति।। जय० ।।

श्री अम्‍बे जी की आरती, जो कोई नद गावै।
कहत शिवानन्‍द स्‍वामी, सुख सम्‍पति पावै।। जय० ।।

सब प्रेम से बोलो अम्‍बे मैया की जय
दुर्गा मैया की जय
चित्र http://www.hindisoch.com से साभार

Friday, February 2, 2018

श्री मदभगवद्गीता की आरती || Shri Madbhagwadgeeta ki Aarti || आरती || Aarti

जय भगवद्गीते , जय भगवद्गीते ।
हरि-हिय-कमल विहारिणि, सुन्‍दर सुपुनीते।।

कर्म-सुकर्म-प्रकाशिनि, कामासक्तिहरा।
तत्‍त्‍वज्ञान-विकाशिनि, विद्या ब्रह्म परा ।। जय ०

निश्‍चल-भक्ति-विधायिनि, निर्मल, मलहारी।
शरण-रहस्‍य-प्रदायिनि, सब विधि सुखकारी।। जय ०

राग-द्वेष-विदारिणि, कारिणि मोद सदा।
भव-भय-हारिणि, तारिणि , परमानन्‍दप्रदा ।। जय ०  

आसुर-भाव-विनाशिनि, नाशिनि तम-रजनी।
दैवी सद्गुणदायिनि, हरि-रसिका सजनी ।। जय ०

समता, त्‍याग सिखावनि, हरि-मुखकी बानी ।
सकल शास्‍त्र की स्‍वामिनि, श्रुतियों की रानी ।। जय ०

दया-सुधा बरसावनि मातु। कृपा कीजै।
हरिपद-प्रेम दान कर अपनो कर लीजै।। जय ०

Tuesday, January 2, 2018

आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के || Aarti Kije Raja Ramchandra Ji Ke || आरती || Aarti

आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।
आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।
पहली आरती पुष्‍प की माला
पहली आरती पुष्‍प की माला
पुष्‍प की माला हरिहर पुष्‍प की माला
कालिय नाग नाथ लाये कृष्‍ण गोपाला हो।
आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।

दूसरी आरती देवकी नन्‍दन
दूसरी आरती देवकी नन्‍दन
देवकी नन्‍दन हरिहर देवकी नन्‍दन
भक्‍त उबारे असुर निकन्‍दन हो
आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।

तीसरी आरती त्रिभुवन मोहे  
तीसरी आरती त्रिभुवन मोहे
त्रिभुवन मोहे हरिहर त्रिभुवन मोहे हो
गरुण सिंहासन राजा रामचन्‍द्र शोभै हो
आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।

चौथी आरती चहुँ युग पूजा
चौथी आरती चहुँ युग पूजा
चहुँ युग पूजा हरिहर चहुँ युग पूजा
चहुँ ओरा राम नाम अउरु न दूजा हो
आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।

पंचम आरती रामजी के भावै
पंचम आरती रामजी के भावै
रामजी के भावै हरिहर रामजी के भावै
रामनाम गावै परमपद पावौ हो
आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।

षष्‍ठम आरती लक्ष्‍मण भ्राता
षष्‍ठम आरती लक्ष्‍मण भ्राता
लक्ष्‍मण भ्राता हरिहर लक्ष्‍मण भ्राता
आरती उतारे कौशिल्‍या माता हो
आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।

सप्‍तम आरती ऐसो तैसो
सप्‍तम आरती ऐसो तैसो
ऐसो तैसो हरिहर ऐसो तैसो
ध्रुव प्रहलाद विभीषण जैसो हो
आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।

अष्‍टम आरती लंका सिधारे
अष्‍टम आरती लंका सिधारे
लंका सिधारे हरिहर लंका सिधारे
रावन मारे विभीषण तारे हो
आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।

नवम आरती वामन देवा
नवम आरती वामन देवा
वामन देवा हरिहर वामन देवा
बलि के द्वारे करें हरि सेवा हो
आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।

कंचन थाल कपूर की बाती
कंचन थाल कपूर की बाती
कपूर की बाती हरिहर कपूर की बाती
जगमग ज्‍योति जले सारी राती हो
आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।

तुलसी के पात्र कण्‍ठ मन हीरा
तुलसी के पात्र कण्‍ठ मन हीरा
कण्‍ठ मन हीरा हरिहर कण्‍ठ मन हीरा
हुलसि हुलसि गये दास कबीरा हो
आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।

जो राजा रामजी के आरती गावै
जो राजा रामजी के आरती गावै
आरती गावै हरिहर आरती गावै
बैठ बैकुण्‍ठ परम पद पावै हो
आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।

Sunday, December 17, 2017

श्री वैष्‍णो देवी माता की आरती || Shri Vaishno Devi Mata ki Aarti

हे मात मेरी, हे मात मेरी,
कैसी यह देर लगाई है दुर्गे।
हे मात मेरी, हे मात मेरी।।१।।

भवसागर में गिरा पड़ा हूँ,
काम आदि गृह में घिरा पड़ा हूँ।
मोह आदि जाल में जकड़ा पड़ा हूँ।
हे मात मेरी, हे मात मेरी।।२।।

न मुझ में बल है न मुझ में विद्या,
न मुझ में भक्ति न मुझमें शक्ति।
शरण तुम्हारी गिरा पड़ा हूँ।
हे मात मेरी, हे मात मेरी।।३।।

न कोई मेरा कुटुम्ब साथी,
ना ही मेरा शारीर साथी।
आप ही उबारो पकड़ के बाहीं।
हे मात मेरी, हे मात मेरी।।४।।

चरण कमल की नौका बनाकर,
मैं पार होउँगा ख़ुशी मनाकर।
यमदूतों को मार भगाकर।
हे मात मेरी, हे मात मेरी।।५।।

सदा ही तेरे गुणों को गाऊँ,
सदा ही तेरे स्वरूप को ध्याऊँ।
नित प्रति तेरे गुणों को गाऊँ।
हे मात मेरी, हे मात मेरी।।६।।

न मैं किसी का न कोई मेरा,
छाया है चारों तरफ अन्धेरा।
पकड़ के ज्योति दिखा दो रास्ता।
हे मात मेरी, हे मात मेरी।।७।।

शरण पड़े है हम तुम्हारी,
करो यह नैया पार हमारी।
कैसी यह देर लगाई है दुर्गे।

हे मात मेरी, हे मात मेरी।।८।।

Friday, December 15, 2017

श्री प्रेतराज सरकार की आरती || Shri Pretraj Sarkar Ki Aarti

श्री प्रेतराज सरकार
बालाजी मंदिर में प्रेतराज सरकार दण्डाधिकारी पद पर आसीन हैं। प्रेतराज सरकार के विग्रह पर भी चोला चढ़ाया जाता है। प्रेतराज सरकार को दुष्ट आत्माओं को दण्ड देने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। भक्तिभाव से उनकी आरती , चालीसा , कीर्तन , भजन आदि किए जाते हैं। बालाजी के सहायक देवता के रूप में ही प्रेतराज सरकार की आराधना की जाती है। प्रेतराज सरकार को पके चावल का भोग लगाया जाता है। 
|| आरती ||
जय प्रेतराज कृपालु मेरी, अरज अब सुन लीजिये।
मैं शरण तुम्हारी आ गया हूँ, नाथ दर्शन दीजिये।
मैं करूं विनती आपसे अब, तुम दयामय चित धरो।
चरणों का ले लिया आसरा, प्रभु वेग से मेरा दुःख हरो।
सिर पर मोर मुकुट कर में धनुष, गलबीच मोतियन माल है।
जो करे दर्शन प्रेम से सब, कटत तन के जाल हैं।
जब पहन बख्तर ले खड़ग, बांई बगल में ढाल है।
ऐसा भयंकर रूप जिनका, देख डरपत काल है।
अति प्रबल सेना विकट योद्धा, संग में विकराल हैं।
तब भुत प्रेत पिशाच बांधे, कैद करते हाल हैं।
तब रूप धरते वीर का, करते तैयारी चलन की।
संग में लड़ाके ज्वान जिनकी, थाह नहीं है बलन की।
तुम सब तरह समर्थ हो, प्रभु सकल सुख के धाम हो।
दुष्टों के मारनहार हो, भक्तों के पूरण काम हो।
मैं हूं मती का मन्द मेरी, बुद्धि को निर्मल करो।
अज्ञान का अन्धेर उर में, ज्ञान का दीपक धरो।
सब मनोरथ सिद्ध करते, जो कोई सेवा करे।
तन्दुल बूरा घृत मेवा, भेंट ले आगे धरे।
सुयश सुन कर आपका, दुखिया तो आये दूर के।
सब स्त्री अरू पुरूष आकर, पड़े हैं चरण हजूर के।
लीला है अद्भुत आपकी, महिमा तो अपरंपार है।
मैं ध्यान जिस दम धरत हूँ , रच देना मंगलाचार है।
सेवक गणेशपुरी महन्त जी, की लाज तुम्हारे हाथ है।
करना खता सब माफ, उनकी देना हरदम साथ है।
दरबार में आओ अभी, सरकार में हाजिर खड़ा।
इन्साफ मेरा अब करो, चरणों में आकर गिर पड़ा।
अर्जी बमूजिब दे चुका, अब गौर  इस पर कीजिये।
तत्काल इस पर हुक्म लिख दो, फैसला कर दीजिए।
महाराज की यह स्तुति, कोई नेम से गाया करे।
सब सिद्ध कारज होय उनके, रोग पीड़ा सब टरे।
‘‘सुखराम’’ सेवक आपका, उसको नहीं बिसराइये।
जै जै मनाऊं आपकी, बेड़े को पार लगाइये।

Thursday, December 14, 2017

श्री बृहस्‍पति देव जी की आरती || Shri Brihaspati Dev Ji Ki Aarti


जय बृहस्पति देवाॐ जय बृहस्पति देवा।
छिन छिन भोग लगाऊंकदली फल मेवा॥
ॐ जय बृहस्पति देवा ।।१।।

तुम पूरण परमात्मातुम अंतर्यामी।
जगतपिता जगदीश्वरतुम सबके स्वामी॥
ॐ जय बृहस्पति देवा।।२।।

चरणामृत निज निर्मलसब पातक हर्ता।
सकल मनोरथ दायककृपा करो भर्ता।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।३।।

तनमनधन अर्पण करजो जन शरण पड़े।
प्रभु प्रकट तब होकरआकर द्वार खड़े॥
ॐ जय बृहस्पति देवा।।४।।

दीनदयाल दयानिधिभक्तन हितकारी।
पाप दोष सब हर्ताभव बंधन हारी॥
ॐ जय बृहस्पति देवा।।५।।

सकल मनोरथ दायकसब संशय हारी।
विषय विकार मिटाओसंतन सुखकारी॥
ॐ जय बृहस्पति देवा।।६।।

जो कोई आरती तेरीप्रेम सहित गावे।
जेष्‍ठानंद आनंदकरसो निश्चय पावे॥
ॐ जय बृहस्पति देवा।।७।।

सब बोलो विष्णु भगवान की जय!
बोलो बृहस्पतिदेव की जय!!

Sunday, October 29, 2017

श्री नर्मदा जी की आरती || Shri Narmada Ji Ki Aarti

जय जगदानन्‍दी, मैया जय जगदानन्‍दी।
जय जगदानन्दी, मैया जय जगदानन्‍दी।
ब्रह्मा हरिहर शंकर, रेवा शिव हर‍ि शंकर
रुद्री पालन्ती।
ॐ जय जगदानन्दी।।

नारद शारद तुम वरदायक, अभिनव पद चण्डी।
हो मैया अभिनव पद चण्डी।
सुर नर मुनि जन सेवत, सुर नर मुनि जन सेवत।
शारद पद वन्‍दी।
ॐ जय जगदानन्दी।।

धूम्रक वाहन राजत, वीणा वादन्‍ती।
हो मैया वीणा वादन्‍ती।
झुमकत-झनकत-झनननझुमकत-झनकत-झननन
रमती राजन्ती।
ॐ जय जगदानन्दी।।

बाजत ताल मृदंगा, सुर मण्डल रमती। 
हो मैया सुर मण्डल रमती।
तुडितान- तुडितान- तुडितान, तुरडड तुरडड तुरडड
रमती सुरवन्ती।
ॐ जय जगदानन्दी।।

सकल भुवन पर आप विराजत, निशदिन आनन्दी।
हो मैया निशदिन आनन्दी।
गावत गंगा शंकर, सेवत रेवा शंकर
तुम भव भय हंती।
ॐ जय जगदानन्दी।। 

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
हो मैया अगर कपूर बाती।
अमरकंटक में राजत, घाट घाट में राजत
कोटि रतन ज्योति।
ॐ जय जगदानन्दी।। 

मैयाजी की आरती निशदिन जो गावे,
हो रेवा जुग-जुग जो गावे
भजत शिवानन्द स्वामी
जपत हर‍िहर स्वामी
मनवांछित पावे।

ॐ जय जगदानन्दी।।

Monday, February 20, 2012

आरती श्री रामदेव जी की || Shri Ram Dev Ji Ki Aarti ||



ओउम जय श्री रामादे स्वामी जय श्री रामादे।
पिता तुम्हारे अजमल मैया मेनादे।। ओउम जय।।

रूप मनोहर जिसका घोड़े असवारी।
कर में सोहे भाला मुक्तामणि धारी।। ओउम जय।।

विष्णु रूप तुम स्वामी कलियुग अवतारी।
सुरनर मुनिजन ध्यावे जावे बलिहारी।। ओउम जय।।

दुख दलजी का तुमने भर में टारा।
सरजीवन भाण को तुमने कर डारा।। ओउम जय।।

नाव सेठ की तारी दानव को मारा।
पल में कीना तुमने सरवर को खारा।। ओउम जय।।


चित्र http://www.sribabaramdev.org से साभार

Sunday, November 20, 2011

आरती श्री खाटू श्याम जी की || Shri Khatu Shyam Ji Ki Aarti ||



ओउम जय श्री श्याम हरे, प्रभु जय श्री श्याम हरे।
निज भक्तन के तुमने पूरण काम करे।

हरि ओउम जय श्री श्याम हरे।।
गल पुष्पों की माला, सिर पर मुकुट धरे।

पीत बसन पीताम्बर, कुण्डल कर्ण पड़े।
हरि ओउम जय श्रीश्याम हरे।।

रत्नसिंहासन राजत, सेवक भक्त खड़े।
खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जरे।

हरि ओउम जय श्रीश्याम हरे।।
मोदक खीर चूरमा, सुवर्ण थाल भरे।

सेवक भोग लगावत, सिर पर चंवर ढुरे।
हरि ओउम जय श्रीश्याम हरे।।

झांझ नगारा और घडि़यावल, शंख मृदंग घुरे।
भक्त आरती गावें, जय जयकार करें।

हरि ओउम जय श्रीश्याम हरे।।
जो ध्यावे फल पावे, सब दुख से उबरे।

सेवक जब निज मुख से, श्री श्याम श्याम उचरे।
हरि ओउम जय श्रीश्याम हरे।।

श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे।
गावत दासमनोहर, मन वांछित फल पावे।

ओउम जय श्री श्याम हरे, प्रभु जय श्री श्याम हरे।।

चित्र efunbox.com से साभार

Sunday, November 6, 2011

आरती श्री सरस्वती माँ की || Shri Saraswati Maa Ki Aarti ||



आरती करूं सरस्वती मातु, हमारी हो भव भय हारी हो।
हंस वाहन पदमासन तेरा, शुभ्र वस्त्र अनुपम है तेरा।।

रावण का मन कैसे फेरा, वर मांगत बन गया सवेरा।
यह सब कृपा तिहारी, उपकारी हो मातु हमारी हो।।

तमोज्ञान नाशक तुम रवि हो, हम अम्बुजन विकास करती हो।
मंगल भवन मातु सरस्वती हो, बहुमूकन वाचाल करती हो।

विद्या देने वाली वीणा, धारी हो मातु हमारी।
तुम्हारी कृपा गणनायक, लायक विष्णु भये जग के पालक।

अम्बा कहायी सृष्टि ही कारण, भये शम्भु संसार ही घालक।
बन्दों आदि भवानी जग, सुखकारी हो मातु हमारी।

सदबुद्धि विद्याबल मोही दीजै, तुम अज्ञान हटा रख लीजै।
जन्मभूमि हित अर्पण कीजै, कर्मवीर भस्महिं कर दीजै।।

ऐसी विनय हमारी भवभय हरी, मातु हमरी हो, आरती करूँ सरस्वती मातु।।
चित्र theoldgiftshop.com से साभार 

Tuesday, October 25, 2011

आरती भगवती महालक्ष्मी जी की || Shri Mahalaxmi Ji Ki Aarti (Arti)||



ओउम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हर विष्णु विधाता।। ओउम।।

उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।। ओउम।।

दुर्गा रूप निरंजनि, सुख-सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि पाता।। ओउम।।

तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभ दाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनि, भव निधि की त्राता।। ओउम।।

जिस घर में तुम रहती, सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता।। ओउम।।

तुम बिन यज्ञ न होवे, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता।। ओउम।।

शुभगुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता।।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता।। ओउम।।

महालक्ष्मी जी की आरति, जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता।। ओउम।।

बोलो भगवती महालक्ष्मी की जय!
चित्र astroyogi.com से साभार

Wednesday, October 19, 2011

आरती श्री परशुराम जी की || Aarti Shri Parashuram Ji Ki ||



ओउम जय परशुधारी, स्वामी जय परशुधारी।
सुर नर मुनिजन सेवत, श्रीपति अवतारी।। ओउम जय।।

जमदग्नी सुत नरसिंह, मां रेणुका जाया।
मार्तण्ड भृगु वंशज, त्रिभुवन यश छाया।। ओउम जय।।

कांधे सूत्र जनेऊ, गल रुद्राक्ष माला।
चरण खड़ाऊँ शोभे, तिलक त्रिपुण्ड भाला।। ओउम जय।।

ताम्र श्याम घन केशा, शीश जटा बांधी।
सुजन हेतु ऋतु मधुमय, दुष्ट दलन आंधी।। ओउम जय।।

मुख रवि तेज विराजत, रक्त वर्ण नैना।
दीन-हीन गो विप्रन, रक्षक दिन रैना।। ओउम जय।।

कर शोभित बर परशु, निगमागम ज्ञाता।
कंध चार-शर वैष्णव, ब्राह्मण कुल त्राता।। ओउम जय।।

माता पिता तुम स्वामी, मीत सखा मेरे।
मेरी बिरत संभारो, द्वार पड़ा मैं तेरे।। ओउम जय।।

अजर-अमर श्री परशुराम की, आरती जो गावे।
पूर्णेन्दु शिव साखि, सुख सम्पति पावे।। ओउम जय।।

चित्र dollsofindia.com से साभार

Sunday, October 9, 2011

आरती श्री गिरिराज जी की || Shri Giriraj Ji Ki Aarti ||



ओउम जय जय जय गिरिराज, स्वामी जय जय जय गिरिराज।
संकट में तुम राखौ, निज भक्तन की लाज।। ओउम जय ।।

इन्द्रादिक सब सुर मिल तुम्हरौ ध्यान धरैं।
रिषि मुनिजन यश गावें, ते भव सिन्धु तरैं।। ओउम जय ।।

सुन्दर रूप तुम्हारौ श्याम सिला सोहें।
वन उपवन लखि-लखि के भक्तन मन मोहे।। ओउम जय।।

मध्य मानसी गंग कलि के मल हरनी।
तापै दीप जलावें, उतरें वैतरनी।। ओउम जय।।

नवल अप्सरा कुण्ड सुहावन-पावन सुखकारी।
बायें राधा कुण्ड नहावें महा पापहारी।। ओउम जय।।

तुम्ही मुक्ति के दाता कलियुग के स्वामी।
दीनन के हो रक्षक प्रभु अन्तरयामी।। ओउम जय।।

हम हैं शरण तुम्हारी, गिरिवर गिरधारी।
देवकीनन्दन कृपा करो, हे भक्तन हितकारी।। ओउम जय।।

जो नर दे परिकम्मा पूजन पाठ करें।
गावें नित्य आरती पुनि नहिं जनम धरें।। ओउम जय।।

चित्र vallabhpith.com से साभार

Thursday, September 29, 2011

आरती श्री महावीर जी की ||Shri Mahaveer Swami Ki Aarti ||



जय महावीर प्रभो। स्वामी जय महावीर प्रभो।
जगनायक सुखदायक, अति गम्भीर प्रभो।।ओउम।।

कुण्डलपुर में जन्में, त्रिशला के जाये।
पिता सिद्धार्थ राजा, सुर नर हर्षाए।।ओउम।।

दीनानाथ दयानिधि, हैं मंगलकारी।
जगहित संयम धारा, प्रभु परउपकारी।।ओउम।।

पापाचार मिटाया, सत्पथ दिखलाया।
दयाधर्म का झण्डा, जग में लहराया।।ओउम।।

अर्जुनमाली गौतम, श्री चन्दनबाला।
पार जगत से बेड़ा, इनका कर डाला।।ओउम।।

पावन नाम तुम्हारा, जगतारणहारा।
निसिदिन जो नर ध्यावे, कष्ट मिटे सारा।।ओउम।।

करुणासागर! तेरी महिमा है न्यारी।
ज्ञानमुनि गुण गावे, चरणन बलिहारी।।ओउम।।

चित्र fundoophotos.com से साभार

Sunday, September 18, 2011

आरती श्री पितर जी की Shri Pitar (Pittar) Ji ki Aarti (Arti)


जय जय पितर महाराज, मैं शरण पड़यों हूँ थारी।
शरण पड़यो हूँ थारी बाबा, शरण पड़यो हूँ थारी।।

आप ही रक्षक आप ही दाता, आप ही खेवनहारे।
मैं मूरख हूँ कछु नहिं जाणूं, आप ही हो रखवारे।। जय।।

आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी, करने मेरी रखवारी।
हम सब जन हैं शरण आपकी, है ये अरज गुजारी।। जय।।

देश और परदेश सब जगह, आप ही करो सहाई।
काम पड़े पर नाम आपको, लगे बहुत सुखदाई।। जय।।

भक्त सभी हैं शरण आपकी, अपने सहित परिवार।
रक्षा करो आप ही सबकी, रटूँ मैं बारम्बार।। जय।।

चित्र tips4india.in से साभार

Monday, September 12, 2011

आरती श्री साईं जी की Shri Sai Baba Ki Aarti (Arti Sainath Ki), Sai Ram ki Arti




आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की।
जा की कृपा विपुल सुखकारी, दुख शोक संकट भयहारी।

शिरडी में अवतार रचाया, चमत्कार से तत्व दिखाया।
कितने भक्त चरण पर आये, वे सुख शान्ति चिरंतन पाये।

भाव धरै जो मन में जैसा, पावत अनुभव वो ही वैसा।
गुरु की उदी लगवे तन को, समाधान लाभत उस मन को।

साईं नाम सदा जो गावे, सो फल जग में शाश्वत पावे।
गुरुवासर करि पूजा-सेवा, उस पर कृपा करत गुरुदेवा।

राम, कृष्ण, हनुमान रूप में, दे दर्शन, जानत जो मन में।
विविध धर्म के सेवक आते, दर्शन इच्छित फल पाते।

जै बोलो साईं बाबा की, जै बोलो अवधूत गुरु की।
साईंदास आरती को गावै, घर में बसि सुख, मंगल पावे।

चित्र saibabaofshirdi.net से साभार

Tuesday, April 12, 2011

आरती श्री सूर्यदेव जी की Aarti Shri Surya Dev Ji Ki




जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव।
राजनीति मदहारी शतदल जीवन दाता।
षटपद मन मुदकारी हे दिनमणि ताता।
जग के हे रविदेव, जय जय जय रविदेव।
नभमंडल के वासी ज्योति प्रकाशक देवा।
निज जनहित सुखसारी तेरी हम सब सेवा।
करते हैं रवि देव, जय जय जय रविदेव।
कनक बदनमन मोहित रुचिर प्रभा प्यारी।
हे सुरवर रविदेव, जय जय जय रविदेव।।

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चित्र desicomments.com से साभार

Sunday, August 8, 2010

आरती श्री शिव जी की (Aarti Shri Shiv Ji Ki)


जय शिव ओंकारा, हर शिव ओंकारा,
ब्रह्‌मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा।

एकानन चतुरानन पंचानन राजै
हंसानन गरुणासन वृषवाहन साजै।

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहै,
तीनों रूप निरखते त्रिभुवन मन मोहे।

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी,
चन्दन मृगमद चंदा सोहै त्रिपुरारी।

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे,
सनकादिक ब्रह्‌मादिक भूतादिक संगे।

कर मध्ये च कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी,
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी।

ब्रह्‌मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका
प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका।

त्रिगुण स्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे
कहत शिवानन्द स्वामी सुख सम्पत्ति पावे॥

चित्र hindudevotionalpower.blogspot.com से साभार

Wednesday, August 4, 2010

आरती श्री रघुवर जी की (Aarti Shri Raghuvar Ji Ki)


आरती कीजै श्री रघुवर जी की,
सत चित आनन्द शिव सुन्दर की॥

दशरथ तनय कौशल्या नन्दन,
सुर मुनि रक्षक दैत्य निकन्दन॥

अनुगत भक्त भक्त उर चन्दन,
मर्यादा पुरुषोत्तम वर की॥

निर्गुण सगुण अनूप रूप निधि,
सकल लोक वन्दित विभिन्न विधि॥

हरण शोक-भय दायक नव निधि,
माया रहित दिव्य नर वर की॥

जानकी पति सुर अधिपति जगपति,
अखिल लोक पालक त्रिलोक गति॥

विश्व वन्द्य अवन्ह अमित गति,
एक मात्र गति सचराचर की॥

शरणागत वत्सल व्रतधारी,
भक्त कल्प तरुवर असुरारी॥

नाम लेत जग पावनकारी,
वानर सखा दीन दुख हर की॥

चित्र vs.rediff.com से साभार